Sanskrit Subhashitas 128

Sanskritनाभिषेको न संस्कारः सिंहस्य क्रियते वने।विक्रमार्जितसत्वस्य स्वयमेव मृगेन्द्रता॥ Hindiकोई और सिंह का वन के राजा जैसे अभिषेक या संस्कार नहीं करता है, अपने पराक्रम

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Sanskrit Subhashitas 3

3. इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत् पण्डितो नरः ।      देशकालबलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत् ॥      पण्डितः नरः बकवत् इन्द्रियाणि संयम्य देशकालबलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत् । 

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Sanskrit Subhashitas 35

35. राजनीति अपरीक्षितपरवञ्चनम् अञ्चति लोभादपेक्षितप्रेक्षी।व्याधूतपक्षमवशो विहन्यते पक्षिवत् क्षितिप:॥ A king who advances towards the enemy without carefully examining others’ deception expecting to see what he

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Sanskrit Subhashitas 168

Sanskritपरवाच्येषु निपुण: सर्वो भवति सर्वदा।आत्मवाच्यं न जानीते जानन्नपि च मुह्मति॥ Hindiदूसरों के बारे में बोलने में सभी हमेशा ही कुशल होते हैं पर अपने

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Sanskrit Subhashitas 151

Sanskritअर्थानाम् अर्जने दु:खम् अर्जितानां च रक्षणे।आये दु:खं व्यये दु:खं धिग् अर्था: कष्टसंश्रया:॥ Hindiधन के कमाने में दुःख है, कमाने के बाद धन के संरक्षण

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Sanskrit Subhashitas 118

Sanskritविद्वत्वं च नृपत्वं च न एव तुल्ये कदाचन्।स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते॥ Hindiविद्वता और राज्य अतुलनीय हैं, राजा को तो अपने राज्य में

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Sanskrit Subhashitas 101

101. दुष्कर्म कलहान्तानि हम्र्याणि कुवाक्यान्तं च सौहृदम्।कुराजान्तानि राष्टराणि कुकर्मान्तं यशो नृणाम्॥ Quarrels destroy homes. Bad words destroys friendship. Bad kings ruin empires and the fame

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