Sanskrit Subhashitas 136

Sanskritउत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्।सोत्साहस्य च लोकेषु न किंचिदपि दुर्लभम्॥ Hindiउत्साह श्रेष्ठ पुरुषों का बल है, उत्साह से बढ़कर और कोई बल नहीं है। उत्साहित

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Sanskrit Subhashitas 27

27. पण्डित गुणवदगुणवद्वा कुर्वता कार्यमादौ परिणतिरवधार्यां यत्नत: पण्डितेन।अतिरभसकृतानां कर्मणानां विपत्ते- र्भवति हृदयदाही शल्यतुल्यो विपाक:॥ Before taking any action, whether good or bad, wise men should

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Sanskrit Subhashitas 159

Sanskritजरा रूपं हरति, धैर्यमाशा, मॄत्यु: प्राणान्, धर्मचर्यामसूया।क्रोध: श्रियं, शीलमनार्यसेवा , ह्रियं काम:, सर्वमेवाभिमान:॥ Hindiवृद्धावस्था सुन्दरता का, धैर्य इच्छाओं का, मृत्यु प्राणों का, धर्मं का

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Sanskrit Subhashitas 143

Sanskritअभिवादनशीलस्य नित्यं वॄद्धोपसेविन:।चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥ Hindiविनम्र और नित्य अनुभवियों की सेवा करने वाले में चार गुणों का विकास होता है –

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Sanskrit Subhashitas 164

Sanskritनात्युच्चशिखरो मेरुर्नातिनीचं रसातलम्।व्यवसायद्वितीयानां नात्यपारो महोदधि:॥ Hindiपरिश्रमी व्यक्ति के लिए मेरु पर्वत अधिक ऊँचा नहीं है, पाताल बहुत नीचा नहीं है और महासागर बहुत विशाल

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Sanskrit Subhashitas 77

77. शोच्यता अनर्थितर्पणं वित्तं चित्तमध्यानदर्पणम्।अतीर्थसर्पणं देहं पर्यन्ते शोच्यतां व्रजेत्॥ Wealth which does not help the needy, and a mind which is proud without meditation and

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