Sanskrit Subhashitas 137

Sanskritव्यायामात् लभते स्वास्थ्यंदीर्घायुष्यं बलं सुखं।आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥ Hindiव्यायाम से स्वास्थ्य, लम्बी आयु, बल और सुख की प्राप्ति होती है। निरोगी होना परम

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Sanskrit Subhashitas 28

28. सुयोधन अपचिक्रमिषु पूर्वं सेनां स्वां परिसान्त्वयन्।विलङ्घयित्वा सत्रेण तत: स्वयमुपक्रमेत्॥ (A King) desiring to attack (an enemy) should first make his soldiers contented (by good

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Sanskrit Subhashitas 158

Sanskritदिवसेनैव तत् कुर्याद् येन रात्रौ सुखं वसेत्।यावज्जीवं च तत्कुर्याद् येन प्रेत्य सुखं वसेत्॥ Hindiदिन में वह करना चाहिए जिससे रात में सुख से रहा

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Sanskrit Subhashitas 142

Sanskritधॄति: क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रह:।धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्॥ Hindiधर्म के दस लक्षण हैं – धैर्य, क्षमा, आत्म-नियंत्रण, चोरी न करना, पवित्रता, इन्द्रिय-संयम, बुद्धि, विद्या, सत्य

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Sanskrit Subhashitas 92

92. मित्रम् आ जीवनास्तात् प्रणया: कोपास्तत्क्षणभङ्गुरा:।परित्यागाश्च नि:सङ्ग भवन्ति हि महात्मनाम्॥ With noble persons friendship lasts for the lifetime; anger is transitory and lasts for a

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Sanskrit Subhashitas 76

76. धीरा अन्यथा शास्त्रगर्भिण्या धिया धीरोऽर्थमीहते।स्वामीव प्राक्तनं कर्म विदधाति तदन्यथा॥ Courageous, cultivated minds their fate would supervise; but linked causation masters them and makes it

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