Sanskrit Subhashitas 138

Sanskritपुस्तकस्था तु या विद्या परहस्तगतं धनं।कार्यकाले समुत्पन्ने न सा विद्या न तद् धनं॥ Hindiपुस्तक में लिखी हुई विद्या, दूसरे के हाथ में गया हुआ

Read more

Sanskrit Subhashitas 13

13. वाक्      केयूरा न विभूषयन्ति पुरुषं हारा न चन्द्रोज्ज्वला      न स्नानं न विलेपनं न कुसुमं नालंकृता मूर्धजा:।     वाण्येका समलंकरोति

Read more

Sanskrit Subhashitas 29

29. रहस्यम् अपण्डितो वापि सुहृत् पण्डितो वाप्यनात्मवान्।मन्त्रमूलं यतो राज्यम् अतो मन्त्रं सुरक्षितम्॥ A well-wisher (friendly) but not learned, and a learned man but unreliable (is

Read more

Sanskrit Subhashitas 174

Sanskritशरदि न वर्षति गर्जति,वर्षति वर्षासु नि:स्वनो मेघ:।नीचो वदति न कुरुते,न वदति सुजन: करोत्येव॥ Hindiपतझड़ के बादल केवल गरजते हैं, बरसते नहीं; वर्षा ऋतु के

Read more

Sanskrit Subhashitas 157

Sanskritसुखार्थी त्यजते विद्यां विद्यार्थी त्यजते सुखम्।सुखार्थिन: कुतो विद्या कुतो विद्यार्थिन: सुखम्॥ Hindiसुख चाहने वाले को विद्या और विद्या चाहने वाले को सुख त्याग देना

Read more

Sanskrit Subhashitas 141

Sanskritलोभमूलानि पापानि संकटानि तथैव च।लोभात्प्रवर्तते वैरं अतिलोभात्विनश्यति॥ Hindiलोभ पाप और सभी संकटों का मूल कारण है, लोभ शत्रुता में वृद्धि करता है, अधिक लोभ

Read more