Sanskrit Subhashitas 124

Sanskritचिता चिंता समाप्रोक्ता बिंदुमात्रं विशेषता।सजीवं दहते चिंता निर्जीवं दहते चिता॥ Hindiचिता और चिंता समान कही गयी हैं पर उसमें भी चिंता में एक बिंदु

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Sanskrit Subhashitas 140

Sanskritक्रोधो वैवस्वतो राजा तॄष्णा वैतरणी नदी।विद्या कामदुघा धेनु: सन्तोषो नन्दनं वनम्॥ Hindiक्रोध यमराज के समान है और तृष्णा नरक की वैतरणी नदी के समान।

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Sanskrit Subhashitas 15

15. सत्सङ्ग      जाड्या धियो हरति सिञ्चति वाचि सत्यं मानोन्नतिं दिशति पापमपाकरोति।     चेत: प्रसादयति दिक्षु तनोति कीर्ति सत्संगति: कथय किं न करोति पुंसाम्॥

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Sanskrit Subhashitas 172

Sanskritयत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः।यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते, सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥ Hindiजहाँ पर स्त्रियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। जहाँ पर

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Sanskrit Subhashitas 155

Sanskritअनेकशास्त्रं बहुवेदितव्यम्, अल्पश्च कालो बहवश्च विघ्ना:। यत् सारभूतं तदुपासितव्यं, हंसो यथा क्षीरमिवाम्भुमध्यात्॥ Hindiअनेक शास्त्र हैं, बहुत जानने को है और समय कम है और

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Sanskrit Subhashitas 122

Sanskritन ही कश्चित् विजानाति किं कस्य श्वो भविष्यति।अतः श्वः करणीयानि कुर्यादद्यैव बुद्धिमान्॥ Hindiकल क्या होगा यह कोई नहीं जानता है इसलिए कल के करने

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Sanskrit Subhashitas 105

105. गुरु अन्नपानादिभिश्चैव वस्त्रालंकारभूषणै:।गन्धमाल्यैर्विचित्रैश्च गुरुं तत्र प्रपूजयेत्॥ One should honour one’s preceptor there with food, drink, etc. as well as clothes and decorating materials, pleasing

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Sanskrit Subhashitas 89

89. उद्वाह परस्परेण स्पृहणीयशोभं न चेदिदं द्वन्द्वमयोजयिष्यत्।अस्मिन् द्वये रूपविधानयत्न: पत्यु:प्रजानां वितथोऽभविष्यत्॥ If the Lord of Creation had not united this couple, possessed of a beauty

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