Sanskrit Subhashitas 127

Sanskritनारिकेलसमाकारा दृश्यन्तेऽपि हि सज्जनाः।अन्ये बदरिकाकारा बहिरेव मनोहराः॥ Hindiसज्जन व्यक्ति नारियल के समान होते हैं, अन्य तो बदरी फल के समान केवल बाहर से ही

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Sanskrit Subhashitas 18

18. सज्जना विपदि धैर्यमथाभ्युदये क्षमा सदसि वाक्पटुता युधि विक्रम:।यशसि चाभिरुचिव्र्यसनं श्रुतो प्रकृतिसिद्धमिदं हि महात्मनाम्॥ Patience in adversity, magnanimity in ascendancy, eloquence in assembly, bravery in

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Sanskrit Subhashitas 34

34.  राजनीति अपराद्धांस्तु सुस्निग्धान् स्नेहोक्त्या मानदानत:।साधयेद् भेददण्डाभ्यां यथायोगेन चापरान्॥ Offended friends should be reconciled by honouring and gifts and kind words; others should be

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Sanskrit Subhashitas 169

Sanskritगौरवं प्राप्यते दानात्,न तु वित्तस्य संचयात्।स्थिति: उच्चै: पयोदानां,पयोधीनां अध: स्थिति:॥ Hindiधन के दान से ही प्रतिष्ठा प्राप्त होती है, धन के संचय से नहीं।

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Sanskrit Subhashitas 152

Sanskritकस्यैकान्तं सुखम् उपनतं, दु:खम् एकान्ततो वा।नीचैर् गच्छति उपरि च, दशा चक्रनेमिक्रमेण॥ Hindiकिसने केवल सुख ही देखा है और किसने केवल दुःख ही देखा है,

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Sanskrit Subhashitas 119

Sanskritमूर्खस्य पञ्च चिन्हानि गर्वो दुर्वचनं तथा।क्रोधश्च दृढवादश्च परवाक्येष्वनादरः॥ Hindiमूर्खों के पाँच लक्षण हैं – गर्व, अपशब्द, क्रोध, हठ और दूसरों की बातों का अनादर॥

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